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एक्युप्रेशर : बिना चीरफाड के, रोगों का निदान


हमारे शरीर के अन्दर रोगों से लड़ने की शक्ति विद्यमान है, जो आपके शरीर में ही विकसित हो जाती है। एक्युप्रेशर एक ऐसी तकनीक है जिसमें न कोई चिरफाड की आवश्यकात नहीं है बस एक्युप्रेशर पद्वति की मदद से आसानी से बिमारी को ठीक किया जा सकता है। हमारे शरीर के सभी भागों में प्र्रेशर प्वाइंट होते हैं। एक्युप्रेशर पद्वति में इन पर विधिवत दबाव डाला जाता है, जिससे रोगग्रस्त हिस्से उद्वेलित होने लगते हैं और रोग ठीक हो जाता है। यह पद्वति रोग को दूर करती है और रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। इस विधि से शरीर में कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए बेहद सुरक्षित और नुकसान रहित है।


यह बात स्वीकार्य है कि स्त्रीयॉ जिस मॉग टीके को सिर पर लगाते हैं, वह बिन्दु एक्युप्रेशर के अनुसार स्त्री के मासिक धर्म को नियमित बनाता है। कान छेदने से अनिद्रा, स्मरण शक्ति की कमी, लकवा खुजली आदि रोगों से रक्षा होती है। हाथों में पहनी हुई चुड़ियॉ कलाई पर इस प्रकार प्रेशर डालती हैं कि प्रोस्टेट का प्रतिबिम्ब केन्द्र बिंन्दु दबा रहता है, जिससे मूत्राशय सम्बन्धीत रोगों का निदान स्ंवय ही हो जाता है। एड़ी से उपर पायल साइटिका नाड़ी को रोगग्रस्त नहीं होने देती है।


इससे लिम्फ ग्रंथियों के बिन्दु भी शरीर की ऊर्जा को बनाए रखते हैं। इसी प्रकार पैरों की उगलियों में पहने जाने वाले बिछुओं के द्वारा भी यही प्रक्रिया सम्पन्न होती है। बिछुये नाक, गले तथा दिल के प्रतिबिंब केन्द्र को दबाए रहते हैं। इनके द्वारा दबे रहने से हृदय रोग से बचाव होता रहता है। यही कारण है कि हमारे समाज में महिलायें लम्बे समय तक बिना दवा दारू के पुरूषों से अधिक जीवन यापन करती है।


एक्युप्रेशर प्राकृतिक सस्ती, अत्यन्त चमत्कारी, एंव आसान प्रणाली है।हमारी संस्कृति में जो परम्परायें चली आ रही है स्त्रीयों के साज सज्जा एंव आभूषणों में कितनी बिमारियों को ठीक करने के उपाय छिपे हुए हैं। जो निम्न हैं स्त्रीयों के कान, नाक, छेदने की प्रक्रिया स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सारे भारत में आभूषणों का प्रयोग बडे़ पैमाने पर किया जाता है इन्हीं आभूषणों के पिछे आश्चर्यजनक परिणाम एंव कई वैज्ञानिक तत्थ छिपे हुए हैं, ये आभूषण जाने-अनजाने हमारे शरीर के अंगों पर दबाव बनाकर हमें स्वस्थ बनाते हैं जैसे गले की हंसुली, कंठहार, पांव की उंगलियों में बिछुये, हाथों की उंगलियों में अगूंठिया, कान में बालियां, मुर्कियां, बुंदे या झुमके, नाक में लौंग, नथ, भुजाओं में बाजूबंद, पैरों की एड़ियों में पाजेब, पायल, झांझर, कमर में करधनी, कलाई में चूड़िया ये सभी आभूषण एक्युप्रेशर बिंदुओं पर दबाव डालकर हमारी अनेक बिमारियों से रक्षा करते आ रहे हैं।


भारतीय संस्कृति में पुरूष वेशभुषा, पहनावा, रीति-रिवाजों को भी स्वास्थ्य के प्रदृष्टिकोण से महत्वपूर्ण योगदान देता है। सिर पर साफा कमर में धागा ये सभी हमें रोगों से बचाते हैं सिर का जो साफा या टोप है, वो सन स्ट्रोक से बचाव करते हैं।
जने़ऊ मूत्र सम्बधी रोग नहीं होने देता। कमर में धागा हार्निया जैसे रोगों से रक्षा करता है। कलाई का कड़ा पुरूष यौन रोगों से बचाव करता है। कर्णछेदन प्रथा तो अनेक देशों में प्रचलित है। इसमें जिस बिंदु पर छेदन करोगे, उसी रोग से बचाव होगा, क्योंकि कान में अनेकों प्रेशर बिंदु मौजूद हैं।


यदि हम लोग संवेदशीलता मर्म बिंदुओं को नियमित रूप से दबाते रहें तो शरीर के सब रोग अपने आप ठीक होते रहेंगे।
शरीर में हर समय विद्युत धाराएं प्रवाहित होती रहती हैं। इन धाराओं के मर्म में बिन्दु होते हैं, जिनको खोजकर यदि हम उन पर कुछ क्षणों तक दबाव डालते रहें तो नाडियों की कमजोरी स्वस्थ्य होकर शरीर हष्ट-पुष्ट होकर चमकदार बन जात है।


प्रकृति ने शरीर को इस ढ़ग का बनाया है कि वह छोटे-छोटे रोगों को स्वयं भगाता रहता है। यदि हम इन रोगों की दवाएं लेगें तो उनका शरीर पर कोई प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि ये रोग न होकर उनके स्वतः मिट जाने के लक्षण है। इसके अलावा प्रकृति ने मर्म बिंदुओं को हानि पहुंचाने वाले विकारों को रोगने का ऐसा प्रबन्ध किया है कि इन बिन्दुओ का बाल भी बांका नहीं होता। जब कभी इनको ंचोट पहुंचती है तो ये धीरे-धीरे टूटने लगते हैं, लेकिन बिल्कुल नष्ट नहीं होते। ये मर्मस्थल बहुत ज्यादा संवेदनशीलता होते हैं। यही कारण है कि इन पर चोट पड़ते ही व्यक्ति तिलमिला उठता है।


एक्युप्रेशर प्रणाली से चिकित्सा करने पर लसिका तंत्र शक्तिशाली हो जाती है। इनको शक्तिशाली बनाने के लिए प्रेशर बिन्दुओं को दबाना पड़ता है। इस प्रणाली की खासियत यह भी है कि इससे किसी भी प्रकार की हानि होने की आशंका नहीं बनती।


इस विधि के साथ-साथ आप किसी भी तरह की दवाई ले सकते हैं। क्योंकि यह प्रणाली प्राकृतिक नियमों पर आधारित है। एलोपैथिक पद्वति में कई तरह के साइड इफैक्ट होत हैं, एक्युप्रेशर एक सरल और असरकारी चिकित्सा प्रणाली है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसमें शरीर के कुछ प्रेशर प्वांइटस पर केवल दबावभर डाल कर छोटे बड़े रोग दूर हो जाते हैं।

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