• Fri. Oct 7th, 2022

शहद (Honey) शहद मधुमक्खियॉ फूलों से एकत्रित करके और पराग से बनाती हैं। मधुमक्खियॉ विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों से मकरन्द इकट्ठा करती हैं। वे पेड़-पौधे जिनसे मधुमक्खियॉ मकरन्द इकट्ठा करने के लिए पसन्द करती हैं उन्हें ‘‘बी फ्लोरा’’ कहते हैं।


यह मधुमक्खियों का आपातकालीन भोजन होता है इसे लम्बे समय तक संग्रहित किया जा सकता है। शहद में कैरोटिन, जैन्योफिल, एन्थोसाइनिन तथा टैनिन जैसे पादप रंग पाये जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से पानी एंव शर्करा पायी जाती है। खनिज तत्वों में सिलिका, लोहा, तॉबा, मैंगनीज, क्लोरीन, कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, सल्फर, एल्यूमिनियम, मैंगनीज आदि खनिज लवण पाये जाते हैं।


शहद के लाभ
शहद एक लाभकारी औशधी है जो प्राचीनकाल से ही औशधी के रूप में प्रयोग की जाती है। शहद का आयुर्वेदिक एंव यूनानी दवाओं में बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता है। यह रक्तशोधक एंव दस्तावर होती है। इसके सेवन से ठंड का असर लगभग न के बराबर होता है। यह कफनाशक भी है। इसे अम्ल-पीत से प्रभावित रोगिंयो को देने से लाभ होता है। मुॅह, ऑख या गले में पड़े छालों के लिए लाभप्रद है। शहद का पौश्टिक महत्व भी कम नहीं होता है। एक किलोग्राम शहद से औसतन 3500 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। शहद को धार्मिक अनुश्ठानों में भी प्रयोग किया जाता है।


शहद के अतिरिक्त मधुमक्खियों से मोम भी प्राप्त होता है इससे मोमबत्तियॉ बनायी जाती है। मोम का सर्वाधिक उपयोग श्रृंगार की वस्तुओं के बनाने में होता है। मोम से प्लास्टिक का सामान, वार्निश एंव स्याही बनाने में किया जाता है।
मधुमक्खियों के छत्ते से शहद एंव मोम के अतिरिक्त एक और महत्त्वपूर्ण पदार्थ इकट्ठा किया जाता है जिसे बी वीनम (Bee Venum) कहते हैं। इसका प्रयोग होम्योपैथिक दवा एपिस टिंचर बनाने में होता है जो गठिया की दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है।






                                                     
                     

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